Wednesday, May 6, 2009

और मैं कस्ट से मर गया

आज सुबह -सुबह अचानक मेरे फ़ोन की घंटी बजी ,मैं गहरी नींद सपनो की दुनिया में खोया हुआ था । फ़ोन मेरे सिराहने पर ही था जिससे फ़ोन की घंटी की आवाज़ मेरे कानो में मछ्छर की भिनभिनाहट की तरह आने लगी । फिर मैं सपनो की दुनिया से निकलने लगा और हकीकत की दुनिया में आ ही रहा था ,और नींद में हिमैने फ़ोन को उठाया और बिना नाम का नम्बर देखकर मेरा मन्न्कई जगह भटक गया । सबसे पहले मेरे दिमाग घर की और गया क्योंकि घर से ही सुबह -सुबह फ़ोन आता था लेकिन घर का फोन होने के बाद मेरा दिमाग मेरे दोस्तों के उपर गया कही मेरा कोई जान पहचान का नही है जो दोस्त का भी फ़ोन दोस्त का भी फ़ोन , दोस्त का भी फ़ोन नही था. फ़ोन किसी नो. से आ रहा था और मेरा मनन और साँस दोनों तेजी के साथ बढ़ते ही जा रहा था.जब मैंने फ़ोन का बटन दबाया तो वह किसी लड़की की आवाज़ थी जिसमे वो सिर्फ़ बोलती जा रही थी वह मेरी हल्लो का जवाब भी नही दे रही थी. फ़ोन कस्त्मेर केयर से था . जब मैंने सुना की वो कस्टमर केयर से बोल रही है तो मैं एक बार फिर kastसे मर गया , यानि की मैं फिर सो गया.

ये फ़ोन की घंटी जो कभी खुशियों की बहार लती है तो कभी दुःख भरी दास्ताँ सुनती है. ये घंटी जो हमारे दिल को झन्ना देती है, ये वोक्त और बेवक्त दोनों समय में कभी भी आ सकती है

2 comments:

  1. badhia soch hai.aaj phone ki ghnti ek samasya ban gayi hai.

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  2. प्रिय बन्धु, हिन्दी हमारी मातृभाषा है इसे शुद्धता से लिखने की कोशिश कीजिये ,परेशानी हो तो स्पेलिंग पूछ लिया करें
    जय हिंद

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